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अमेरिकी डॉलर येन के मुकाबले 30 वर्षों में अपने उच्चतम स्तर पर पहुंचा

चौंका देने वाली मुद्रास्फीति के कारण ब्याज में 100 आधार अंकों की वृद्धि की अटकलों के बीच, अमेरिकी डॉलर येन के मुकाबले अपने उच्चतम शिखर पर पहुंच गया। अगले महीने नीति बैठक में, फेड कई रणनीतिकारों की भविष्यवाणी के अनुसार बढ़ोतरी की घोषणा कर सकता है। अमेरिकी डॉलर 147.67 येन तक चला गया, जो अगस्त 1990 के बाद से एक अप्रत्याशित वृद्धि है, जब इसने 147.66 येन के उच्चतम शिखर को दर्ज किया था। हालांकि, उतार-चढ़ाव भरे सत्र में यह तेजी से घटकर 147.2 येन पर आ गया। पिछले महीने जापान की मुद्रा गिरकर 145.9 डॉलर प्रति डॉलर हो गई थी, जिसने 20 साल में पहली बार लगभग 20 अरब अमेरिकी डॉलर खर्च कर देश को हस्तक्षेप करने के लिए मजबूर किया। व्यापारियों द्वारा यह अनुमान लगाया जा रहा है कि येन 160.20 प्रति डॉलर से भी कम गिर सकता है, जो अप्रैल 1990 में दर्ज किया गया था। श्रम विभाग के अनुसार, अमेरिकी उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) सितंबर में 0.4 फीसदी बढ़ा है, जबकि अगस्त में यह 0.1 फीसदी बढ़ा था। डॉलर में यूरो और स्विस फ्रैंक के मुकाबले भी तेजी आई। Read this story in English वीडियो देखें: 

फेडरल रिजर्व द्वरा दरों में बढ़ोतरी, 8% से अधिक अमेरिकी मुद्रास्फीति को रोकने की कोशिश

फेडरल रिजर्व, संयुक्त राज्य अमेरिका की केंद्रीय बैंकिंग प्रणाली, देश के तेजी से बढ़ते बाजार के बावजूद दरों में बढ़ोतरी पर आमादा है। इसका इरदा केवल चौंका देने वाली 8% से अधिक मुद्रास्फीति पर अंकुश लगाना है। यह पता नहीं है कि महंगाई कब थमेगी, इसीलिए यह मौद्रिक नीति को कड़ा करती रहेगी। अमेरिकी व्यवसाय, बढ़ती लागत से निपटने में असमर्थ, अपने बोझ को ग्राहकों पर डाल रहे हैं, जिससे मांग में गिरावट आ रही है। भोजन, श्रम, माल की बढ़ती लागत के कारण चीजों को प्रबंधित करना अधिक कठिन हो रहा है कि क्या आवश्यक है और क्या नहीं। अमेरिकी शेयर बाजार भी इससे अछूता नहीं है और पिछले तीन तिमाहियों से शेयरों में लगातार गिरावट आ रही है। जबकि फेड दरों पर बढ़ोतरी करने पे अडिग है, अन्य अर्थव्यवस्थाएं अमेरिकी डॉलर की बढ़ती कीमत से संकेत ले रही हैं। उनके केंद्रीय बैंक भी दरें बढ़ाने में  लगी हुईं हैं। क्या यह दुनिया की शीर्ष अर्थव्यवस्थाओं के बीच बढ़ती हताशा को दर्शाता है? क्या यह विश्व आर्थिक मंदी के आने वाले तूफान के लिए एक लाल झंडा है, जो इतना अचानक हो सकता है कि हर देश को इसका खामियाजा भुगतना पड़ेगा? क्या...