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फेडरल रिजर्व द्वरा दरों में बढ़ोतरी, 8% से अधिक अमेरिकी मुद्रास्फीति को रोकने की कोशिश

फेडरल रिजर्व, संयुक्त राज्य अमेरिका की केंद्रीय बैंकिंग प्रणाली, देश के तेजी से बढ़ते बाजार के बावजूद दरों में बढ़ोतरी पर आमादा है। इसका इरदा केवल चौंका देने वाली 8% से अधिक मुद्रास्फीति पर अंकुश लगाना है। यह पता नहीं है कि महंगाई कब थमेगी, इसीलिए यह मौद्रिक नीति को कड़ा करती रहेगी। अमेरिकी व्यवसाय, बढ़ती लागत से निपटने में असमर्थ, अपने बोझ को ग्राहकों पर डाल रहे हैं, जिससे मांग में गिरावट आ रही है। भोजन, श्रम, माल की बढ़ती लागत के कारण चीजों को प्रबंधित करना अधिक कठिन हो रहा है कि क्या आवश्यक है और क्या नहीं। अमेरिकी शेयर बाजार भी इससे अछूता नहीं है और पिछले तीन तिमाहियों से शेयरों में लगातार गिरावट आ रही है। जबकि फेड दरों पर बढ़ोतरी करने पे अडिग है, अन्य अर्थव्यवस्थाएं अमेरिकी डॉलर की बढ़ती कीमत से संकेत ले रही हैं। उनके केंद्रीय बैंक भी दरें बढ़ाने में  लगी हुईं हैं। क्या यह दुनिया की शीर्ष अर्थव्यवस्थाओं के बीच बढ़ती हताशा को दर्शाता है? क्या यह विश्व आर्थिक मंदी के आने वाले तूफान के लिए एक लाल झंडा है, जो इतना अचानक हो सकता है कि हर देश को इसका खामियाजा भुगतना पड़ेगा? क्या...